20 अप्रैल 571 ईस्वी

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*🥀 20 अप्रैल 571 ईस्वी 🥀*



🔛 हुज़ूरﷺ की तारीखें पैदाइस में इख़्तिलाफ़ है। मगर क़ौले मशहूर यही है की वकीअए "असहाबे फिल" से 55 दिन के बाद 12 रबीउल अव्वल ब मुताबिक 20 अप्रैल 571 ईस्वी विलादते बा सआदत की तारीख है।
 
तारीखे आलम में ये वो निराला और अज़मत वाला दिन है की इसी रोज़ आलमे हस्ती के इज़ाद का बाइष और तमाम जहान के बिगड़े निज़ामो को सुधारने वाला यानी हमारे आक़ाﷺ आलमे वुज़ूद में रौनक अफ़रोज़ हुए और पाकीज़ा बदन, नाफ बरीदा, खतना किये हुए खुशबु में बेस हुए ब हालते सज्दा, मक्कए मुकर्रमा की मुक़द्दस सर जमीन में अपने वालीदे माजिद के मकान में पैदा हुए।

आप के चाचा अबू लहब की लौंडी "सुवैबा" ख़ुशी में दौड़ती हुई अबू लहब को भतीजा पैदा होने की ख़ुश खबरी दी तो उसने इस ख़ुशी में शहादत की ऊँगली के इशारे से उसे आज़ाद कर दिया

जिसका स-मरा अबू लहब को ये मिला की उस्की मौत के बाद उस्के घर वालो ने उस्को ख्वाब में देखा और हाल पूछा तो उस्ने अपनी उंगली उठा कर ये कहा की तुम लोगो से जुदा होने के बाद मुझे कुछ खाने पिने को नहीं मिला बजुज़ इस के की "सुवैबा" को आज़ाद करने के सबब से इस ऊँगली के जरए कुछ पानी पिला दिया जाता है।

इस मौके पर हज़रते अब्दुल हक् मुहद्दीस दहलवी फरमाते है की जब अबू लहब जो काफ़िर था और उसकी मज़म्मत में क़ुरआन नाज़िल हुआ हुज़ूर की विलादत पर ख़ुशी मानाने से तो उस मुसलमान का क्या हाल होगा जो हुज़ूर की मुहब्बत में सरशार हो कर ख़ुशी मनाता है और अपना माल खर्च करता है।
 *📚 मदारिजुन्नुबुव्वत जिल्द 2, सफ़ह 14* 
*📚 सीरते मुस्तफाﷺ सफ़ह 70, 71, 72*

मोमिनो पढ़ते रहो तुम अपने आक़ा (ﷺ) पर दुरुद है फरिश्तों का वज़ीफ़ा अस़्स़लातु वस्सलाम आज इस्वी तारीख के हिसाब से *नबी ए पाक सल्लल्लाहु अ़लैह वसल्लम की विलादत का दिन (20 अप्रैल 571 इस्वी) हैं*
जिसे दुनियां Durud🌏Day (यौमे दुरूद) के रूप में मनाते हैं
आप सभी से गुजारिश हैं ज़्यादा से ज़्यादा दुरूद शरीफ़ पढ़कर नबी पाक ﷺ की बारगाह में नज़र करें और अपनी महब्बतों का इज़हार करें



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