13 रज़ब उल मुकद्दसा “यौमें विलादत मुबारका”

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*🥀 13 रज़ब उल मुकद्दसा “यौमें विलादत मुबारका”🥀*



*✏️ अमीरूल मौमिनीन शाह ए मर्दा शेरे यज़दा ला फताह ईल्ला अली ला सैफ़ ईल्ला जुल्फैंकार वज़ीर ए विलायत वालिद ए हसनैनकरिमैन बाबउल ईल्म फातैंह खैंबर हैदर ए कर्रार दामादें सैय्यदना रसूल ए कायनात ﷺ आयातें ततहीर ए महताब आयातें मुबाहिला ए आफताब बाद अज़ अफ़ज़ल दौ नूरैंने अबान मौला ए क़ायनात नफ्सें सैय्यदना रसूल ए कायनात ﷺ असदउल्लाह असदउलरसूल ﷺ हुज़ूर मौला अली अल मुर्तज़ा अल अबू तुरआब इब्नें जनाबें अबी तालिब करमअल्लाहुल वजहुलक़रीम रज़ीअल्लाहु तआला अन्हूमा की यौमें विलादत कुल कायनात के कुल मौमिनीन मौमीनात मुस्लिमीना मुस्लिमात को खूब हसीन और बरकत के साथ मुबारक हो मेरा ख़ास पैग़ाम है आज के दिन फातिहा ख्वानी का ख़ास खयाल रखें आज कम से एक जरूरतमंद को सदका दें और एक प्यासे को पानी पिलाए एक भूखे को खाना खिलाए दीने तौहीद के पैग़ाम को आम करे इतना भी ना कर सके तो कम से कम आज के दिन किसी का दिल ना तोड़े और हमेशा इस अमल से खुद की हिफाज़त करें इंशाअल्लाह फिर फ़ैज़ हासिल करें*
*"अली" का इश्क़ मुक़द्दर सवार देता है*
*"अली" का बुगज़ तो चहरे बिगाड़ देता है*
*नबी के ज़िक्र से मिलती है रूह को ठण्डक*
*"अली" का ज़िक्र लहू को उबाल देता है*
*परख़ना हो किसी को तो "या अली" कह दो*
*ये वो अमल है जो शजरे ख़ागाल देता है*


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*👏🏁 गदा ए फकीर रज़वी कादरी ह़नफी बरेलवी 🔴*

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20 अप्रैल 571 ईस्वी