हज़रते फातिमा का आलमे गुर्बत

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    *🥀 हज़रते फातिमा का आलमे गुर्बत 🥀*



*हज़रते इमरान बिन हुसैन से मरवी है हुज़ूरﷺमुझसे हुस्ने ज़न रखते थे एक मरतबा हुज़ूरﷺने फरमाया ऐ इमरान तुम्हारा मेरे नज़दीक एक खास मकाम है तुम मेरी बेटी फातिमा"रज़ियल्लाहु त‌आला अन्हा"की इयादत को चलोगे मैं ने कहा"मेरे मां बाप आप पर कुरबान जरूर चलूंगा"चुनान्चे हम रवाना हो गए और हज़रते फातिमा"रज़ियल्लाहु त‌आला अन्हा"के दरवाजे पर पहुंचे आपﷺने दरवाज़ा खट-खटाया और सलाम के बाद अन्दर आने की इजाज़त तलब फरमाई हज़रते फातिमा"रज़ियल्लाहु त‌आला अन्हा"ने फरमाया तशरीफ लाइये आपﷺने फरमाया मेरे साथ एक और शख्स भी है पूछा गया हुज़ूरﷺदूसरा कौन है आप ने फरमाया इमरान हज़रते फातिमा"रज़ियल्लाहु त‌आला अन्हा"बोलीं रब्बे ज़ुल जलाल की कसम जिस ने आपﷺको हक के साथ मबऊस फरमाया मैं सिर्फ एक चादर से तमाम जिस्म छुपाए हुवे हूं आपﷺने दस्ते अक्दस के इशारे से फरमाया तुम ऐसे ऐसे पर्दा कर लो उन्हों ने अर्ज़ किया इस तरह मेरा जिस्म तो ढक जाता है मगर सर नहीं छुपता आप ने उन की तरफ एक पुरानी चादर फेंकी और फरमाया तुम इस से सर ढांप लो इस के बाद आप घर में दाखिल हुवे और सलाम के बाद पूछा बेटी कैसी हो हज़रते फातिमा"रज़ियल्लाहु त‌आला अन्हा"ने अर्ज़ किया हुज़ूरﷺमुझे दोहरी तक्लीफ है एक बीमारी की तक्लीफ और दूसरे भूक की तक्लीफ मेरे पास ऐसी कोई चीज़ नहीं है जिसे खाकर भूक मिटा सकूं रसूलुल्लाहﷺयह सुन कर अश्कबार हो गए और फरमाया बेटी घबराओ नहीं अल्लाह त‌आला की कसम मेरा रब के यहां तुम से ज्यादा मर्तबा है मगर मैं ने तीन दिन से कुछ नहीं खाया है अगर मैं अल्लाह तआला से मांगूं तो मुझे जरूर खिलाए मगर मैं ने दुनिया पर आखिरत को तरजीह दी है फिर आपﷺने हज़रते फातिमा के कंधे पर हाथ रख कर फरमाया"खुश हो जाओ तुम जन्नती औरतों की सरदार हो"हज़रते फातिमा रज़ियल्लाहु त‌आला अन्हा ने पूछा हज़रते आसिया और मरयम कहां होंगी आपﷺने फरमाया आसिया अपने ज़माने की औरतों की और तुम अपने ज़माने की औरतों की सरदार हो तुम जन्नत के ऐसे महल्लों में रहोगी जिसमें कोई ऐब कोई दुख और कोई तक्लीफ नहीं होगी फिर फरमाया अपने चचाज़ाद के साथ खुश रहो मैं ने तुम्हारी शादी दुनिया और आखिरत के सरदार के साथ की है।*

*📚(मुकाशफतुल कुलूब 255,256)*



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*🏁मसलके आला हजरत 🔴*

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