हाजी वारिस पाक की शिकायत पर गौसुल वक़्त का जवाब

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴



*🥀 हाजी वारिस पाक की शिकायत पर गौसुल वक़्त का जवाब 🥀*



✏️ एक दफ़ा ओवैस ए दौरान हज़रत मौलाना शाह फ़ज़्ले रहमान गंजमुरादाबादी अलैहिर्रहमा की बारगाह में हाजी वारिस अली शाह रहमतुल्लाह अलैह की शिकायत आई कि वह खिलाफ़ शरा है, इस बात पर हज़रत फ़ज़्ले रहमान साहब ने फ़रमाया, "मियाँ! किसी को बुरा न समझा करो, एक काफ़िर था लेकिन बातिन में मुसलमान था, जब वह विसाल कर गया तो ख्वाब में हमको दिखाया गया कि बहुत खुश हाल है। तवायफ़े तो हमसे भी मुरीद हैं लेकिन बैत होने के बाद अपना बसर हलाल खर्चों पर करती हैं यह सुनकर किसी ने कहा, "वारिस पाक की मुरीदा तवायफ़े तो आज भी नाच करती हैं " इस पर हज़रत फ़ज़्ले रहमान साहब ने फ़रमाया, "हराम करती हैं, हाजी वारिस ने उनको मुरीद किया तो हाजी साहब को इसका सवाब होगा और तवायफ़े मुरीद होने के बाद भी गुनाह कर रही है तो सज़ा पाएंगी। 

✏️ ऐसे ही एक दफ़ा हाफ़िज़ वारिस अली शाह गंजमुरादाबाद तशरीफ़ लाए, मौलाना अब्दुल गनी साहब ने फ़रमाया कि मैं भी वहां मौजूद था तो हज़रत फ़ज़्ले रहमान साहब ने हाजी वारिस पाक से फ़रमाया, "सुना है तुमने खुदा की नमाज़ छोड़ दी "हाजी साहब ने कहा, "जी नहीं पढ़ता हूँ "फिर हाजी साहब ने मस्जिद में वुज़ू किया और हज़रत शाह फ़ज़्ले रहमान ने इमामत की और हाजी साहब ने आपके पीछे नमाज़ अदा की । 

*📚 {इनामात ए रहमान बा तुफ़ैल व बिहुर्मती मौलाना फ़ज़्ले रहमान : 164}*

✏️ हाफ़िज़ वारिस अली शाह लखनवी अलैहिर्रहमा का बयान है कि एक शख्स दाढ़ी मुंडे हुए मौलाना शाह फ़ज़्ले रहमान की खिदमत में आए हज़रत मौलाना ने उस शख्स की जब यह मकरूह और गैर तशरह (शरीयत के खिलाफ़) सूरत देखी तो फ़रमाया कि इसको निकाल दो किसी शख्स ने उनको इशारा किया कि आप उठकर यहां से बाहर चले जाएं तो वह शख्स चला गया और मस्जिद के कवाड़ो से जा लगा और झांक झांक कर देखता और रोता रहा, कई मरतबा आपकी उस पर नज़र भी पड़ी थोड़ी देर बाद हज़रत मौलाना फ़ज़्ले रहमान ने फ़रमाया कि उस शख्स को बुला लाओ जब वह शख्स आया तो हज़रत ने पूछा कि क्यों आये हो उस शख्स ने अर्ज़ किया कि एक रोज़ की ग़ैर हाज़िरी की वजह से हाकिम ने मुझे बरखास्त कर दिया है आप हज़रत मौलाना ने उसकी पेशानी पर कुछ लिख दिया और कहा," अभी इसी वक़्त चले जाओ जब वह शख्स रेल से अपने शहर में उतरा तो हाकिम का चपरासी दौड़ता हुआ आया कि, "साहब ने तुझको बुलाया है, जल्दी काम पर हाज़िर हो "फिर हाजी वारिस अली शाह लखनवी आगे बयान करते हैं कि, "अल्लाह अल्लाह क्या शान मोजज़ा नुमाई है और खुलूस का बेमिस्ल नमूना नज़र आता है कि वह शख्स मस्जिद से निकाले जाने के बाद भी दामन ए दोस्त नहीं छोड़ता है, इसी तरह मोहब्बत के रिश्ते में खुदा और बंदे का मामला है (यानि बंदा गुनाह करके भी अल्लाह से रुजू करता रहता है और अल्लाह बार बार करम करके उसको नेकी की हिदायत देता रहता है 


👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*
https://chat.whatsapp.com/BlTnmJKrHakLQ0Y3Q9Q1KC

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

MIRA DATAR

20 अप्रैल 571 ईस्वी