आला हज़रत वारिस ए पाक की नज़र में
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*🥀 आला हज़रत वारिस ए पाक की नज़र में 🥀*
*✏️ हजरत सैयद वारिस अली शाह रहमातुल्लाह अलैह* बडे पाऐ के बुजुर्ग गुजरे हैं, बडी सादा जिन्दगी गुजारी, जब आप *हुजूर सलल्लाहू तआला अलैहि व सल्लम के शहर मदीना शरीफ पहुंचें* तो जूती 👞 👞उतार दीं, फिर उस के बाद आपने पूरी जिन्दगी जूती के बगैर ही गुजारी ।
*ये है अदब हुज़ूर अलैहिस्सलाम के शहरे मदीना ए मुनव्वरा का*
जब *आला हज़रत* ने सैय्यद वारिस अली शाह रहमातुल्लाह अलैह की खिदमत में हाज़िर होने का इरादा फरमाया ,उस वक़्त आपकी उम्र 25 साल थी,
आप सैयद साहब की ज्यारत के लिए "देवा शरीफ" पहुंचे । *आला हज़रत और सैय्यद वारिस ए पाक की उस वक़्त तक आपस में कोई मुलाकात नही थी*, मुलाकात का यह पहला मौका था सैय्यद वारिस ए पाक रोनक अफ़रोज़ थे, मुरीदीन आपकी ख़िदमत में हाज़िर थे, *जब आला हज़रत पहुंचे तो सैय्यद वारिसे पाक फौरन संभल कर बैठ गये और फरमाया*.........👇
" *मौलाना आला हज़रत आ गए* "
हज़रत सैय्यद वारिस अली शाह साहब के पास बड़े बड़े उलामा ए किराम आया करते थे, लेकिन आप किसी को मौलाना नही कहते थे और ना ही *आला हज़रत* कहते थे पहली बार आपने जिसको मौलाना और आला हज़रत कहा तो वह *सैय्यदी सरकार इमाम अहमद रजा ख़ान फाजिले बरेलवी* ही हैं।
दोस्तो जब आले रसूल वली ए कामिल हुज़ूर सय्यद वारिस ए पाक की नज़र में सरकार आला हज़रत का ये मक़ाम है तो फिर आम आदमी आपके मक़ाम व मर्तबे को कया समझ पाएगा, कितने बे वक़ूफ़ बदनसीब हैं वो लोग जो हुज़ूर आला हज़रत की मुख़ालिफ़त करते हैं, और अपनी आख़िरत ख़राब करते हैं,
*📚 चहरा ए वददुहा,*
*लेखक मोलाना इलाही बख्श क़ादरी, अंजुमन गुलामाने कुतबे मदीना लाहौर,पेज नंबर, 105)*
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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*
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