हुज़ूर शदरुश्शरीआ रहमतुल्लाह अलैह के नज़दीक पीर होने के लिए शर्ते
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*🥀 हुज़ूर शदरुश्शरीआ रहमतुल्लाह अलैह के नज़दीक पीर होने के लिए शर्ते 🥀*
🔛 *विलायात का बयान*
तम्बीह:- चूंकि आम तौर पर मुसलमानों को अल्लाह के फज्ल और करम से औलिया ए किराम से नियाजमन्दी और पीरों के साथ एक खास अकीदत होती है उन के सिलसिले में दाखिल होने को दीन और दुनिया की भलाई समझते हैं । इसलिए इस जमाने के वहाबियों ने लोगों को गुमराह करने कि लिए यह जाल फैला रखा है कि पीरी मुरीदी भी शुरू कर दी । हालांकि यह लोग औलिया के मुन्किर हैं इसीलिए जब किसी का मुरीद होना हो तो खूब अच्छी तरह तहकीक कर लें । नहीं तो अगर कोई बदमजहब हुआ तो ईमान से भी हाथ धो बैठेंगे ।
*ऐ बसा इबलीस आदम रूये हस्त पस ब हर दस्ते न बायद दाद दस्त*
तर्जमा:- "होशियार, खबरदार अक्सर इबलीस आदमी की शक्ल में होता है इसलिए हर ऐरे के हाथ में हाथ नहीं देना चाहिए ।"
पीरी के लिये शर्त:- पीर के लिए चार शर्ते हैं । बैअत करने और मुरीद होने से पहले उनको ध्यान में रखना फ़र्ज़ है।
( 1 ) पीर सुम्नी सहीहुल अकीदा हो ।
( 2 ) पीर इतना इल्म रखता हो कि अपनी जरूरत के मसाइल किताबों से निकाल सके ।
( 3 ) फासिके मोलिन न हो । यानी खुले आम गुनाहे कबीरा में मुलव्विस न हो जैसे नमाज छोड़ना , गाने बजाने में मशगूल रहना या दाढ़ी मुंडाना वगैरा ।
( 4 ) उसका सिलसिला हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तक मुत्तसिल हो ।
"हम दीन दुनिया और आख़िरत में अल्लाह से माफी और आफियत माँगते हैं और पाकीज़ा शरीअत पर इस्तिकामत ( मज़बूती के साथ काइम रहना ) चाहते हैं और मुझे अल्लाह तआला ही की जानिब से तौफीक है उसी पर मैंने भरोसा किया और उसी की जानिब माइल हुआ और दूरूद नाजिल फरमाये अल्लाह तआला अपने हबीब पर, उन की आल असहाब उनके फर्जन्दों और उनकी जमात पर हमेशा हमेशा और तमाम तारीफ खास कर अल्लाह को जो तमाम आलम का रब है ।
*📚 बहारे शरीअत, हिस्सा 1, सफ़ह 72*
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