हुज़ुर मुफ़्ती ए आज़म् हिंद मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरी रहमतुल्लाह अलैह की हालाते ज़िन्दगी

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*🥀 हुज़ुर मुफ़्ती ए आज़म् हिंद मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरी रहमतुल्लाह अलैह की हालाते ज़िन्दगी 🥀*



*🔛¹ आप की विलादत बा सआदत :-*
आप की विलादत बा सआदत 22, ज़िल्हिज्जा 1310, हिजरी मुताबिक़ 18, जुलाई 1893, ईस्वी बरोज़ पीर बरैली शरीफ में हुई।

*आप का इसमें गिरामी :-*
जिस वक़्त आप की पैदाइश हुई उस वक़्त आप के वालिद माजिद सरकार आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान रहमतुल्लाह अलैह मारहरा शरीफ़ में जलवा अफ़रोज़ थे वहीं रात में ख्वाब देखा के लड़के की पैदाइश हुई है, ख्वाब ही में “आले रहमान” नाम रखा , हज़रत मखदूम शाह अबुल हुसैन अहमदे नूरी मियां रहमतुल्लाह अलैह ने “अबुल बरकात मुहीयुद्दीन जिलानी” नाम तजवीज़ फ़रमाया बाद में “मुस्तफा रज़ा” खान उर्फ़ क़रार फ़रमाया और खानदान की रस्म के मताबिक़ “मुहम्मद” के नाम पर अक़ीक़ा हुआ।

*आप के पीरो मुर्शिद की बशारत :-*
हज़रत मखदूम शाह अबुल हुसैन अहमदे नूरी मियां रहमतुल्लाह अलैह ने इमामे अहले सुन्नत फाज़ले बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह से फ़रमाया, मौलाना जब में बरेली आऊँगा तो इस इस बच्चे को ज़रूर देखूंगा वो बहुत ही मुबारक है चुनाचे जब आप बरेली शरीफ़ रौनक अफ़रोज़ हुए उस वक़्त सरकार मुफ़्ती ए आज़म हिन्द मुहम्मद मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरी रहमतुल्लाह अलैह की उमर शरीफ़ छह 6 महीने की थी ख्वाइश के मुताबिक़ बच्चे को देखा और इस नेमत के हुसूल पर इमामे अहले सुन्नत फाज़ले बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह को मुबारक बाद दी और फ़रमाया ये बच्चा दीनो मिल्लत की बड़ी खिदमत करेगा।

और मख़लूक़े खुदा को इस की ज़ात से बहुत फैज़ पहुंचेगा ये बच्चा “वली” है इस की निगाहों से लाखों गुमराह इंसान दीने हक़ पर होंगें ये फैज़ का दरिया बहाएगा ये फरमाते हुए हज़रत नूरी मियां रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी मुबारक उंगलियाँ बुलंद इक़बाल बच्चे के दहन (मुँह) मुबारक में डाल कर मुरीद किया और इसी वक़्त तमाम सलासिल की इजाज़त व खिलाफत भी अता फ़रमाई।

आप सिलसिलए आलिया क़दीरिया रज़विया के 41 इकतालीस वे इमाम व शैख़े तरीक़त व पीरे कामिल है आफ़ताबे इल्म व मारफत, माहिताबे रुश्दो हिदायत, वाक़िफ़े असरारे शरीअत दानाए रुमूज़ो हक़ीक़त ताजदारे अहले सुन्नत, जामे माक़ूलात व मन्क़ूलात, शमशुल आरफीन, नाइबे सय्यदुल मुर्सलीन, मुहद्दिसे अकमल, फकीहे अजल, मुक़्तदाए आलम, शहज़ादए मुजद्दिदे आज़म हुज़ूर सय्यदी व मुर्शीदी मुफ्तिए आज़म हिन्द मौलाना अल्हाज अश्शाह अबुल बरकात मुहीयुद्दीन जिलानी आले रहमान मुहम्मद मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरी बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह “आप सिलसिलए आलिया क़दीरिया रज़विया के 41 इकतालीस वे इमाम व शैख़े तरीक़त व पीरे कामिल हैं”।

*सायाए जुमला मशाइख या खुदा हम पर रहे !*
*रहम फरमा आले रहमा मुस्तफा के वास्ते !*



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