हुज़ुर मुफ़्ती ए आज़म् हिंद मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरी रहमतुल्लाह अलैह की हालाते ज़िन्दगी
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*🥀 हुज़ुर मुफ़्ती ए आज़म् हिंद मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरी रहमतुल्लाह अलैह की हालाते ज़िन्दगी 🥀*
*🔛³ आप का मज़ारे मुबारक :-*
आप का मज़ारे मुबारक मुक़द्दस खानकाहे रज़विया बरैली शरीफ उत्तर प्रदेश में है इमामे अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह के बाएं पहलू में ज़्यारत गाह खासो आम हैं हर साल लाखों अक़ीदत मंद मशाइख व उलमा दानिश्वरान शरीक होते हैं और फुयूज़ व बरकात से मुस्तफ़ीज़ होते हैं !
*आप की तालीम व तरबियत :-*
हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह एक ऐसे इल्मी व रूहानी खनवादे के चश्मों चिराग हैं जहाँ का पूरा माहौल इल्म व नूर के सच्चे में ढाला हुआ है फिर आप इससे मुतअस्सिर न हो ये कैसे हो सकता है चुनाचे खूब खूब इक्तिसाबे फैज़ किया और जहाँ भी मौक़ा मिला शोक से हासिल किया चुनाचे आप ने हज़रत मौलाना शाह रहम इलाही मंगलोरी व मौलाना बशीर अहमद अलीगढ़ अलैहिर्रहमा से खुसूसी दरस हासिल किया उस के बाद उलूम व फुनून सरकार अला हज़रत रहमतुल्लाह अलैह की आग़ोशे तरबियत में जुमला उलूम व फुनून को पाए तकमील तक पहुँचाया !
तफ़्सीर, फ़िक़्ह, उसूले फ़िक़हा, सरफो नहो, के अलावा तजवीद, अदब, फलसफा, मंतिक, रियाज़ी, इल्मे जफर व तकसीर, इल्मे तौक़ीत, और फन्ने तारिख गोई में भी कमाल हासिल किया !
*बैअत व खिलाफत :-*
आप को बैअत का शरफ़ क़ुत्बे आलम शैख़े तरीक़त हज़रत शाह अबुल हुसैन अहमदे नूरी मारेहरवी रहमतुल्लाह अलैह से था और छेह 6 साल की उमर शरीफ में आप के शैख़े तरीक़त ने बैअत करने के बाद जुमला सलासिल मसलन क़दीरिया, चिश्तिया, नक्शबंदिया, सोहरवर्दिया, मदारिया वगैरह की इजाज़त से भी नवाज़ा था अपने शैख़े तरीक़त के अलावा वालिद माजिद इमामे अहले सुन्नत फाज़ले बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह से भी खिलाफत व इजाज़त हासिल थी !
25 सफर 1340 हिजरी मुताबिक़ 28 अक्टूबर 1921 ईस्वी बरोज़ जुमा के वालिद माजिद इमामे अहले सुन्नत फाज़ले बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह का विसाल हुआ खलफ़े अकबर हुज़ूर हुज्जतुल इस्लाम मौलाना शाह हामिद रज़ा खान रहमतुल्लाह अलैह के मंसबे सज्जादगी और खानकाहे आलिया क़दीरिया बरकातिया रज़विया और मन्ज़रे इस्लाम के तमाम उमूर व फ़राइज़ की ज़िम्मेदारी आप के सौंप दी गई हुज़ूर हुज्जतुल इस्लाम के विसाल के बाद बा इत्तिफ़ाक़े राए हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह खानकाहे आलिया क़दीरिया बरकातिया रज़विया और मन्ज़रे इस्लाम की सज्जादगी और तमाम उमूरे दीनिया के फ़राइज़ की ज़िम्मेदारी आप के सुपुर्द की गई !
*आप का पहला फ़तवा :-*
आप ने सिर्फ तेहरा 13 साल की क़लील उमर में रज़ाअत का मसला लिखा बादे फरागत आला हज़रत रहमतुल्लाह अलैह की हयाते तय्यबा में ही फतवा नवेसी का काम सौंप दिया गया था जिस की इब्तिदा यानि शुरू का वाक़िअ बड़ा दिल चस्प है हज़रत अल्लामा ज़फरुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह व हज़रत मौलाना सय्यद अब्दुर रशीद साहब रहीमा हुमुल्लाह दारुल इफ्ता में काम करते थे अभी आप की नो उमरी का आलम था एक दिन दारुल इफ्ता में पहुंचे तो देखा के हज़रत अल्लामा ज़फरुद्दीन बिहारी रहमतुल्लाह अलैह फतवा लिख रहे थे मराजे के लिए फतावा रज़विया अलमारी से निकलने लगे इस पर हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया क्या फतावा रज़विया देख कर जवाब लिखते हैं !
मौलाना ने फ़रमाया अच्छा तुम बगैर देखो लिखदो तो जाने हज़रत ने कमल बर्दाश्त जवाब लिख दिया जो रज़ाअत का मसला था ये आप का पहला फतवा था जो अपनी ज़िन्दगी में क़लम बंद फ़रमाया इसलाहो तसही के लिए वो जवाब इमामे अहले सुन्नत की ख़िदमात में पेश किया गया सेहत जवाब पर इमामे अहले सुन्नत बहुत खुश हुए और *“अल जवाब बी ओनिल्लाहिल अज़ीज़िल वह्हाब”* लिख कर दस्त खत फरमाए यही नहीं बल्के इनआम के तौर पर *“अबुल बरकात मुहीयुद्दीन जिलानी आले रहमान मुहम्मद उर्फ़ मुहम्मद मुस्तफा रज़ा”* की मुहर मौलाना हाफ़िज़ यक़ीनुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह के भाई से बनवा कर अता फ़रमाई ये वाक़िअ 1328 हिजरी का है बाराह 12 साल तक वालिद माजिद की ज़िन्दगी में फतवा नवेसी करते रहे जिस का सिसिला आखरी उमर तक जारी रहा ये मुहर हज़रत के तीसरे हज मौके पर जद्दा में दीगर सामानो के साथ गम हो गई !
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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