क्या हुज़ूर मुफ़्तिये आज़म हिन्द हुज़ूर ग़ौसे पाक रज़ी अल्लाहो तआला अन्हु के नाइबो मज़हर थे*
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*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
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*🧮 पोस्ट 114▪️*
*📝 सवाल-;*
*📇 क्या हुज़ूर मुफ़्तिये आज़म हिन्द हुज़ूर ग़ौसे पाक रज़ी अल्लाहो तआला अन्हु के नाइबो मज़हर थे*❓
*✍️ जवाब-:*
*📇 क़ारी नेअमत उल्लाह साहब ने राक़िमुल हुरूफ़ मुहम्मद अमानत रसूल रज़वी से बयान किया कि मौलाना अब्दुल क़य्यूम साहब तेग़ी मुज़फ्फरपूरी इमाम सुन्नी मदीना नरील वाड़ी कब्रिस्तान रोड मुंबई ने मुझसे और मुस्तफ़ा बाज़ार अलीमी दरबार होटल के सामने जलसए आम में इस वाक़ये को बयान फ़रमाया कि जब मैं फैज़ाबाद टाट शाह जामा मस्ज़िद में इमाम था उस वक़्त आशिक़ अली फ़ैज़ाबादी ने मुझसे कहा कि मैं हुज़ूर मुफ्तीए आज़म का मुरीद होना चाहता हूं मैने उन्हें बता दिया कि हज़रत फैज़ाबाद आने वाले हैं यहीं मुरीद हो जाना जब हज़रत तशरीफ़ ले आएं तो मौलाना अब्दुल क़य्यूम साहब आशिक़ अली को लेकर हज़रत की बारगाह में हाज़िर हुए और अर्ज़ किया कि हुज़ूर इनको मुरीद फ़रमा लें हज़रत ने कलिमाते बैयत आशिक़ अली से कहलवाने शुरू किये और आखिर में फ़रमाया कि कहो मैंने अपना हाथ ग़ौसे पाक के हाथ में दिया तो आशिक़ अली बोले कि मैंने अपना हाथ हुज़ूर मुफ्तीए आज़म के हाथ में दिया हज़रत ने फ़रमाया कि मैं जो कहता हूं वो कहो कहो कि मैंने अपना हाथ गौसे आज़म के हाथ में दिया तो आशिक़ अली बोले अभी आपने मुझसे कहलवाया है कि मैं झूठ नहीं बोलूंगा और अभी आप कहलवा रहे हैं कि मैंने अपना हाथ ग़ौसे पाक के हाथ में दिया कैसे तो हज़रत फ़रमाते हैं कि हमारे मशायख का यही तरीक़ा है कि ग़ौसे पाक तक पहुंचा दिया जाता है कहो कि मैंने अपना हाथ ग़ौसे पाक के हाथ में दिया फिर भी आशिक़ अली नहीं बोले तो हज़रत को जलाल आ गया और अपना इमामा शरीफ़ उतार कर आशिक़ अली के सर पर रख दिया और उसी जलाल में फ़रमाया कि कहता क्यों नहीं की मैंने अपना हाथ हुज़ूर ग़ौसे पाक के दस्ते पाक में दिया और फिर आशिक़ अली बार बार कहने लगे कि हां मैंने अपना हाथ ग़ौसे पाक के हाथ में दिया और यही कहते कहते बेहोश हो गए जब होश आया तो लोगों ने दरयाफ्त किया तो आशिक़ अली कहते हैं कि जैसे ही हज़रत ने अपना इमामा मेरे सर पर रखा तो मैंने देखा कि हुज़ूर ग़ौसे पाक हाज़िर हैं और फ़रमा रहें है कि आशिक़ अली मुफ्तीए आज़म हिन्द का हाथ मेरा ही हाथ है ये मेरे नाइबो मज़हर हैं कहो कि मैंने अपना हाथ ग़ौसे पाक के हाथ में दिया बस मैं यही कहने लगा और बेहोश हो गया*❗
*📚 तजल्लियाते शैख मुस्तफ़ा रज़ा, सफ़ह 164*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*
*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म*
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*
*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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