हुज़ुर मुफ़्ती ए आज़म् हिंद मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरी रहमतुल्लाह अलैह की हालाते ज़िन्दगी
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*🥀 हुज़ुर मुफ़्ती ए आज़म् हिंद मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरी रहमतुल्लाह अलैह की हालाते ज़िन्दगी 🥀*
*🔛⁴ आप का अख़लाक़ो किरदार व खुसूसी आदतें :-*
हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह उस खानवादे के चश्मों चिराग हैं जिन्होंने ज़माने के तहज़ीब व अख़लाक़, उख़ुवत मसावाते इस्लामी का दरस दिया जिन का दर हर मांगता के लिए हर वक़्त खुला रहता है आप में खुश अख़लाक़ी शफ़क़त तवाज़ो इंकिसारी और मुहब्बत व इखलास बदर्जाए अतम पाए जाते थे आप ने कभी किसी गरीब की दावत के रद नहीं फ़रमाया अमीरो कबीर और बड़े लोगों से दूर भागते थे और निहायत ही पाकीज़ा और बुलंद किरदार के मालिक थे !
आप की हयाते तय्यबा में एक बार अकबर अली खान साहब जो यूपी के गवर्नर थे जो आप की ज़यरत करना चाहते थे !
मगर हज़रत उन के आने से कुछ देर पहले पुराना शहर बरेली में एक बीमार दम तोड़ते हुए गरीब सुन्नी की इआदत के लिए तशरीफ़ लेगए !
इसी तरह फखरुद्दीन अली अहमद साबिक़ सदर जम्हूरिया जब वज़ीर थे इसी तरह न जाने कितने वज़ीर और अमीर आते रहते थे मगर हज़रत उन से मिलना गवारा नहीं करते थे क्यूंकि हज़रत के सियासत दुनियादारी से क्या लगाओ मेहमान की खातिर दारी में कोई कसर नहीं उठा रखते, हज़रत मेहमान खाने में तसरीफ ले जाकर एक एक मेहमान से दरयाफ्त फरमाते के खाना खाया के नहीं चाय मिली या नहीं अक्सर ये भी देखा गया के आप खुद ही मेहमानो के लिए घर के अंदर से जाकर खाने का तशत लेकर आते थे !
हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह हर मुस्लमान को ज़ाहिर व बातिन दोनों हालातों में मुस्लमान देखना चाहते थे हर एक को इस्लामी शिआर अपनाने की तालीम उठते बैठते देते थे दाढ़ी मुंडों नग्गे सर वालों और अंग्रेजी लिबास पहिनने वालों से बेज़ारी का इज़हार फरमाते सर पर टोपी लगाने दाढ़ी रखने और इस्लामी लिबास पहिनने की तलक़ीन करते थे !
*टाई बांधने वाले से सख्त बेज़ारी इज़हार करते थे !*
और टाई खींच लेते बांधने वालों से तौबा कराते थे और उस पे तज्दीदे बैअत व तज्दीदे निकाह का हुक्म लगते थे हर काम या चीज़ के लेने देने का दाहिने हाथ से एहतिमाम फरमाते गौरमिंट को सरकार कहने और कोर्ट को अदालत कहने से मना फरमाते थे !
क़ुतुब अहादीस पर दूसरी किताबें नहीं रखते थे क़िब्ले की तरफ कबि नहीं थूकते और नहीं क़िब्ले की तरफ पाऊँ करते !
क़ब्रिस्तान में जब भी तशीरफ़ ले जाते तो पूरा पैर रख कर नहीं चलते बल्के हमेशा पंजो लके बल तशरीफ़ ले जाते यहाँ तक के धूप में आधा आधा घंटा इसाले सवाब और फातिहा ख्वानी में मसरूफ रहते लेकिन पंजो के बल ही खड़े रहते !
बद फाल निकलने को हमेशा मना करते उलमा की बहुत इज़्ज़त करते सय्यदों का अदब व एहतिराम इस अंदाज़ से करते जैसे कोई रियाया अपने बादशाह का एहतिराम करती है गैर इस्लामी नाम रखने को मना करते और अंग्रेज़ों और गैर मुस्लिमो के नाम रखने को मना फरमाते सख्त नाराज़ होते और नाम बदल देते ,अब्दुल्लाह, अब्दुर रहमान, मुहम्मद, अहमद नाम को पसंद फरमाते !
*आप की तवाज़ो इंकिसारी :-*
आप के अंदर तवाज़ो इंकिसारी कूट कूट कर भरी हुई थी अगर किसी को गैर शरई हरकत पर दांत देते थे या किसी मौक़ पर नाराज़गी का इज़हार करते थे तो बाद में उसे समझाते और उसकी दिल जो फरमाते और दुआओं से नवाज़ते अक्सर लोग हज़रत की शान में मन्क़बत पढ़ते तो उन्हें उससे रोकते और फरमाते के में इस लाइक कहाँ अल्लाह पाक इस लाइक बना दे !
*एक करामात ट्रेन रुकने की :-*
सफ़रों हज़र में भी हमेशा बा जमात नमाज़ वक़्ते मुअय्यना पर अदा फरमाते , एक बार नागपुर से तशरीफ़ ले जा रहे थे रास्ते में मगरिब का वक़्त हो गया आप फ़ौरन गाड़ी से उतर पड़े लोगों ने कहा भी के गाड़ी चलने ही वाली है मगर हज़रत को फ़िक्र नमाज़ दामनगीर थी हज़रत के उतरते ही आप के साथी भी उतर पड़े वुज़ू कर के अभी नमाज़ की नियत बांधी थी के ट्रेन छूट गई हज़रत और उनके साथियों का सारा सामान ट्रेन ही में रह गया ट्रेन के चलते ही कुछ बद अक़ीदह लोगों ने फब्ती भी कसी के मियां की गाड़ी गई लेकिन हज़रत नमाज़ में मसरूफ थे नमाज़ से फारिग हुए तो पेलेट फॉर्म खली था हज़रत के साथी सामान जाने की वजह से परेशान थे मगर हज़रत मुतमइन थे अभी सब सोच ही रहे थे के सामान का क्या होगा इतने में देखा के गॉर्ड साहब भागे चले आरहे हैं और उनके पीछे पचासों मुसाफिर भी दौड़ते आ रहे हैं गॉर्ड ने कहा हुज़ूर गाड़ी रुक गई हज़रत ने फ़रमाया ह्इंजन ख़राब हो गया है आखिर हज़रत डब्बे में बैठे इंजन बदला गया और इस तरह पोन घंटे की देर के बाद गाड़ी चली !
*💐 "मांगने वाला सब कुछ पाए रोता आए हसंता जाए" 💐*
*💐 "ये है उन की अदना करामत मुफती आज़म ज़िंदाबाद" 💐*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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