हुज़ूर सय्यद ए सज्जाद इमाम ज़ैनुल आबिदीन रज़ियल्लाहु तआला अन्हुम
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*🥀 हुज़ूर सय्यद ए सज्जाद इमाम ज़ैनुल आबिदीन रज़ियल्लाहु तआला अन्हुम 🥀*
🔛 नवासा ए रसूलﷺ मज़हर ए सब्र ए अय्यूबी मद्दाह ए शैख़ैन हामिल ए औसाफ़ ए ख़तनैन जानशीन ए इमाम हुसैन साबिर ए आज़म सय्यद ए सज्जाद हज़रत सय्यदुना इमाम अबू मोहम्मद *अली बिन हुसैन ज़ैनुल आबिदीन* रज़ियल्लाहु तआला अन्हुम
आप की विलादत मुबारका-: 5, शाबान उल मुअज़्ज़म 38 हिजरी बरोज़ जुमेरात मदीना तैयबा में हुई एक रिवायत के मुताबिक़ 33 हि. या 36 हि.।
इस्म शरीफ-: अली
कुनियत-: अबू मोहम्मद अबू बक्र अबुल हसन
अलक़ाब-: सज्जाद ज़ैनुल आबिदीन, ज़ुन नक़बात साबिर ए आज़म।
वालिद माजिद:- नवासा ए रसूल ﷺ, शहीदे कर्बला हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु।
वालिदा माजिदा:- हज़रत सय्यदा शहर बानो आप शाहे ईरान की शहज़ादी थीं अमीरुल मोमिनीन हज़रत सय्यदुना उमर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के दौर में जब ईरान फ़तह हुआ तो आप मदीना आईं और हज़रत उमर ने आपका निकाह हज़रत इमाम हुसैन से कराया।
आपका नाम अली औसत बिन हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु है और ज़ैनुल आबेदीन के लक़ब से इस लिए मशहूर हुये क्योंकि आप बहुत ज़्यादा इबादत करते थे, आपने 10 साल अपने दादा सय्यदना मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का सायये करम पाया 10 साल इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का और 11 साल अपने वालिद हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का, आपकी वालिदा का नाम शहर बानो बिन्त यज़्दगर्द है
*📚 मसालिकस सालेकीन, जिल्द 1, सफ़ह 207*
रिवायत में आता है कि दुनिया में 5 हज़रात बहुत ज़्यादा रोये हैं
1.हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अपनी खता पर
2.हज़रत यअक़ूब अलैहिस्सलाम हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम के बिछड़ने पर
3.हज़रत यहया अलैहिस्सलाम ख़ौफे इलाही से
4.हज़रते फातिमा ज़ुहरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का दुनिया जाहिरी पर्दा फरमानें के बाद
5.हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु वाक़ियाये कर्बला के बाद
*📚 तफसीरे नईमी, जिल्द 1, सफ़ह 339*
आप हर दिन 1000 रकात नफ्ल पढ़ा करते थे, एक रोज़ आप नमाज़ में मशगूल थे कि अचानक घर में आग लग गई मगर आप नमाज़ युंही खुशु व खुज़ु से पढ़ते रहे जब नमाज़ से फारिग़ हुए तो लोगों ने कहा कि हुज़ूर घर को आग लग गयी थी हम सब बुझाने की कोशिश कर रहे थे मगर आपने इसकी परवाह तक ना की, तो आप फरमाते हैं कि मैं भी आग ही बुझा रहा था मगर आखिरत की, सुब्हान अल्लाह,एक दिन आप रास्ते से जा रहे थे कि एक गुस्ताख ने आपको बुरा कहा तो आप फरमाते हैं कि अगर मैं ऐसा ही हूं जैसा कि तूने कहा तो खुदा मुझे माफ फरमाये ये सुनकर वो शर्मिंदा हुआ और माफी चाही तो आपने उसे माफ फरमा दिया
*📚 रौज़ुर्रियाहीन, सफ़ह 55*
हज़रत इमाम ज़ैनुल आबिदीन की बशारत-: हदीस शरीफ़ में इमाम इब्नुल मदीनी हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत करते हैं कि उन्होंने फ़रमाया मैं नबी ए करीमﷺ की ख़िदमत में हाज़िर था और इमाम हुसैन हुज़ूर की गोद में बैठे खेल रहे थे हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया "ऐ जाबिर हुसैन का एक बेटा होगा जिसका नाम “अली” होगा क़यामत के दिन निदा देने वाला उसे “सय्यदुल आबिदीन” के लक़ब से पुकारेगा"।
*📚 अस्सव़ाइक़ुल मुहर्रिक़ा सफ़ह 436, 437*
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*इमाम ज़ैनुल आबिदीन का ख़ौफ़े ख़ुदा और ज़ोह्द-ओ-तक़्वा*
1) हज़रत ताऊस फ़रमाते हैं मैंने एक रात मस्जिदे हराम में हज़रत इमाम ज़ैनुल आबिदीन को देखा कि सजदे की हालत में ये दुआ फ़रमा रहे थे
“عَبْدُكَ بِفَنَآئِكَ مِسْكِيْنُكَ بِفَنَآئِكَ سَآئِلُكَ بِفَنَآئِكَ فَقِيْرُكَ بِفَنَآئِكَ” तर्जुमा ऐ अल्लाह! तेरा बंदा तेरे आस्ताना-ए-करम पर है, तेरा मिस्कीन तेरी चौखट पर है, तेरा मंगता तेरे दरवाज़े पर है, तेरा फ़क़ीर तेरे दर-ए-फ़ज़ल-ओ-रहमत पर है।
हज़रत ताऊस फ़रमाते हैं। अल्लाह की क़सम मैंने जिस मुसीबत में भी अल्लाह तआला को इन अल्फ़ाज़ के साथ पुकारा, अल्लाह तआला ने वो मुसीबत मुझसे दूर कर दी।
2) आप रोज़ाना एक हज़ार रकअत नफ़्ल पढ़ते थे।
3) जब आप वुज़ू फ़रमाते तो आप पर कपकपी तारी हो जाती और चेहरे का रंग ज़र्द हो जाता। जब आपसे इसकी वजह पूछी गई तो आपने फ़रमाया: “तुम जानते हो (नमाज़ में) कि किसके हुज़ूर हाज़िर होना है” यानी ये हालत अल्लाह के सामने खड़े होने के ख़ौफ़ की वजह से होती है।
4) एक मर्तबा आप नमाज़ अदा फ़रमा रहे थे कि घर में आग लग गई। उस वक़्त हालत-ए-सजदा में थे। लोगों ने देखा तो शोर मचा दिया कि या इब्ने रसूल ﷺ आग लग गई, आग लग गई, मगर आपने सजदे से सर ना उठाया। लोगों ने भाग-दौड़ कर आग बुझाई। इस दौरान आपने पूरे इत्मीनान से नमाज़ मुकम्मल फ़रमा ली। तो लोगों ने अर्ज़ किया कि हुज़ूर आपने नमाज़ क्यों नहीं तोड़ी हालांकि जिस जगह आप नमाज़ पढ़ रहे थे वहां आग लग गई थी। तो हज़रत सय्यद सज्जाद ने जवाब दिया “मुझे इस दुनिया की आग के मुक़ाबले में दोज़ख़ की आग की ज़्यादा फ़िक्र है।” अल्लाहु अकबर क्या ख़ौफ़े ख़ुदा है और एक हम हैं कि ख़ुद को उनका मानने वाला भी कहते हैं और ख़ौफ़े ख़ुदा, जहन्नुम की आग से बेपरवाह हैं। अल्लाह सय्यद सज्जाद के सदक़े हमें हिदायत अता फ़रमाए। आमीन
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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